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इंडिया ऑटिज़्म सेंटर ने ‘ऑटिज़्म इन प्रैक्टिस’ के माध्यम से जीवनभर ऑटिज़्म देखभाल पर संवाद का नेतृत्व किया
कोलकाता, 13 अप्रैल 2026: इंडिया ऑटिज़्म सेंटर (आईएसी), जो ऑटिज़्म और इससे जुड़े विकास संबंधी स्थितियों वाले व्यक्तियों के समर्थन के लिए समर्पित एक प्रमुख गैर-लाभकारी संगठन है, “ऑटिज़्म इन प्रैक्टिस” के माध्यम से विश्व ऑटिज़्म जागरूकता माह का आयोजन किया, जो सोसाइटी ऑफ पीडियाट्रिक न्यूरोलॉजी बंगाल के सहयोग से आयोजित माता-पिता केंद्रित ज्ञान सत्रों की एक सुविचारित श्रृंखला थी।
भारत में न्यूरोडाइवर्स व्यक्तियों के लिए जीवनभर आवासीय देखभाल के सबसे बड़े इकोसिस्टम “समावेश” के निर्माण के अपने विज़न के अनुरूप, यह पहल आईएसी की एक समावेशी, जागरूक और सहयोगी सामुदायिक वातावरण बनाने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।इन सत्रों में कई प्रमुख विशेषज्ञ पैनलिस्ट के रूप में शामिल हुए, जिनमें डॉ. सुदीप साहा, डॉ. अरिजीत चट्टोपाध्याय, डॉ. जशोधरा चौधुरी, डॉ. मौसुमी मुखर्जी, डॉ. अबीर मुखर्जी, डॉ. नंदिता चट्टोपाध्याय, डॉ. कौशांबी बसु, डॉ. प्रदीप पारिया, डॉ. एमडी साहिदुल अरेफिन और डॉ. सिद्धार्थ नंदी शामिल थे।
कार्यक्रम की शुरुआत इंडिया ऑटिज़्म सेंटर के निदेशक और सीईओ श्री जैशंकर नटराजन के मुख्य संबोधन से हुई, जिसने सार्थक संवाद और जागरूकता के लिए माहौल तैयार किया। इसके बाद ऑक्यूपेशनल थेरेपी पर एक केंद्रित सत्र हुआ, जिसे एसओसीएच के क्लिनिकल डायरेक्टर और एआईओटीए के हरियाणा चैप्टर के अध्यक्ष डॉ. मनीष समनानी ने लिया, जिसमें उन्होंने ऑटिज़्म स्पेक्ट्रम पर व्यक्तियों में कार्यात्मक स्वतंत्रता बढ़ाने के लिए व्यावहारिक रणनीतियाँ साझा कीं।
कार्यक्रम में कई विशेषज्ञ-नेतृत्व वाले सत्र हुए, जिनमें से “मेडिसिन्स एंड बियॉन्ड” सत्र का संचालन डॉ. रुद्रजीत सिन्हा ने किया, जिसमें विभिन्न विशेषज्ञ डॉक्टर, थेरेपिस्ट और क्षेत्र के विशेषज्ञ शामिल हुए।
इस चर्चा में ऑटिज़्म देखभाल के समेकित दृष्टिकोणों को समझाया गया, जिसमें चिकित्सा, व्यवहार और थेरेपी आधारित हस्तक्षेपों के संतुलन के महत्व पर जोर दिया गया, और यह भी बताया गया कि हर व्यक्ति की जरूरत के अनुसार बहु-विषयक देखभाल मॉडल आवश्यक हैं।
इसमें ऑटिज़्म देखभाल के अलावा बदलती हस्तक्षेप विधियों और बाल न्यूरोलॉजी के बढ़ते क्षेत्र पर भी चर्चा की गई, जिसमें शुरुआती पहचान, विशेष देखभाल और उपचार में लगातार हो रही प्रगति के महत्व को बताया गया।
कार्यक्रम के दूसरे भाग में अन्य सत्र भी हुए, जिनमें स्पेक्ट्रम पर बच्चों के पोषण पर प्रो. डॉ. कल्पना दत्ता द्वारा सत्र लिया गया, जिसमें आहार, खाने से जुड़ी चुनौतियों और बच्चों के समग्र विकास में पोषण की भूमिका पर चर्चा की गई।
इसके बाद माता-पिता के अनुभव साझा करने के लिए एक बातचीत सत्र हुआ, जिसमें सुश्री नीलांजना रामबोथु और सुश्री सुमित्रा पॉल बक्शी ने अपने अनुभव और पालन-पोषण की यात्रा के महत्वपूर्ण पड़ाव साझा किए।
इसके बाद सुश्री रंजना चक्रवर्ती द्वारा प्री-टीन और टीन बच्चों के व्यवहार सुधार पर सत्र हुआ, जिसमें भावनात्मक नियंत्रण, सामाजिक कौशल और व्यावहारिक उपायों पर चर्चा की गई। कार्यक्रम का समापन डॉ. जशोधरा चौधुरी और सखी सिंघी के समापन वक्तव्य के साथ हुआ।
कार्यक्रम पर बोलते हुए, इंडिया ऑटिज़्म सेंटर के निदेशक और सीईओ श्री जैशंकर नटराजन ने कहा, “‘ऑटिज़्म इन प्रैक्टिस’ परिवारों को सही जानकारी, साधन और समझ देकर उन्हें सही निर्णय लेने में सक्षम बनाने की हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। आईएसी में हम मानते हैं कि जागरूकता के साथ व्यावहारिक मार्गदर्शन भी जरूरी है, और यह पहल उस कमी को पूरा करने की दिशा में एक कदम है, जो माता-पिता जटिल देखभाल यात्रा में महसूस करते हैं।
इसी के साथ, हमारा ध्यान ऑटिज़्म से जुड़े व्यक्तियों की दीर्घकालिक जरूरतों पर भी है, जो प्रारंभिक हस्तक्षेप से आगे जाकर विशेष रूप से आवासीय देखभाल से जुड़ी हैं। हमारे आगामी आवासीय इकोसिस्टम ‘समावेश’ के माध्यम से हम एक सुरक्षित, संरचित और समावेशी वातावरण बनाने का लक्ष्य रखते हैं, जो सम्मान, स्वतंत्रता और जीवनभर देखभाल को सुनिश्चित करे, ताकि स्पेक्ट्रम पर व्यक्ति वयस्कता तक अच्छे से आगे बढ़ सकें।”
अपने संबोधन में, एसओसीएच के क्लिनिकल डायरेक्टर और एआईओटीए हरियाणा चैप्टर के अध्यक्ष डॉ. मनीष समनानी ने कहा, “इंडिया ऑटिज़्म सेंटर का हिस्सा बनना वास्तव में एक महत्वपूर्ण अनुभव रहा। माता-पिता, विशेषज्ञों और स्पेक्ट्रम पर व्यक्तियों के साथ बातचीत ने सीखने और समझने के लिए एक अच्छा मंच दिया।
जहाँ मुझे घर के माहौल में व्यवहार प्रबंधन की व्यावहारिक रणनीतियों पर बात करने का अवसर मिला, वहीं सत्र के दौरान साझा किए गए अनुभवों से मुझे भी महत्वपूर्ण सीख मिली। ऐसे सहयोगात्मक प्रयास हमारी सामूहिक समझ को मजबूत करने और अधिक व्यक्ति-केंद्रित देखभाल दृष्टिकोण विकसित करने में आवश्यक हैं।”
डॉ. रुद्रजीत सिन्हा, कंसल्टेंट एडवांस्ड लैप्रोस्कोपी और गैस्ट्रोएंटरोलॉजी – अपोलो क्लिनिक, डायरेक्टर – गुड गट क्लिनिक एवं सीसीसी सर्जरी, और वाइस प्रेसिडेंट, स्पेशल ओलंपिक्स भारत, ने कहा, “एक चिकित्सक होने के साथ-साथ एक १७ वर्ष के स्पेक्ट्रम पर बच्चे के अभिभावक के रूप में, मेरा मानना है कि ऑटिज़्म जागरूकता केवल एक महीने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि रोजमर्रा की समझ और स्वीकार्यता का हिस्सा होनी चाहिए।
‘ऑटिज़्म इन प्रैक्टिस’ जैसे प्रयास विभिन्न चिकित्सा विशेषज्ञता और अनुभवों को एक साथ लाते हैं, जिससे वर्तमान उपचार और भविष्य की दिशा पर सार्थक चर्चा संभव होती है। सही समय पर हस्तक्षेप, उचित सहयोग और समाज की स्वीकृति के साथ, स्पेक्ट्रम पर व्यक्ति संतोषजनक जीवन जी सकते हैं और समाज में सक्रिय भागीदारी कर सकते हैं।”
यह पहल आईएसी के निरंतर प्रयासों को दर्शाती है, जो विशेषज्ञों के माध्यम से जागरूकता बढ़ाने और परिवारों को सहयोग देने के लिए किए जा रहे हैं, ताकि ऑटिज़्म देखभाल के लिए समझदारी, संवेदनशीलता और दीर्घकालिक दृष्टिकोण विकसित हो सके।
दवाओं, प्रमाण आधारित थेरेपी और किशोरावस्था व वयस्कता की ओर संक्रमण की योजना पर व्यावहारिक जानकारी देकर, यह पहल परिवारों को जीवनभर की देखभाल यात्रा को आत्मविश्वास और स्पष्टता के साथ संभालने में मदद करती है।


